जालोर जिले के सैरणा गांव के संत का परिचय
जालोर जिले के एक प्रतिभाशाली संत का परिचय
योगेंद्र कुमार
सेरना न्यूज ।
जन्म स्थान सेरना जाति भट्ट उद्देश्य सहस्त्र(ब्राह्मण) गोत्र भारद्वाज जन्म का नाम फुलाराम जी पिता का नाम श्री कृपा शंकर जी बचपन से वैराग्य जीवन शिक्षा के गांव दानदास मैं हुई बचपन से सियाणा ब्रह्मचारी जी श्री 1008
देवनंद जी का सत्संग मिला फिर शादी के परपंच में न फंसकर सियाणा गांव जिला जालौर मैं रिश्ता हुआ था
वहां से ओढ़नी ओढ़ाकर बैराग का रास्ता लिया भ्रमण जीवन मैं पढ़ाई की सिद्धपुर मैं बिंदु सरोवर संस्कृत पाठशाला में आचार्य रोहिडा वाले नृपदाशंकर जी व्याकरण की शिक्षा ली फिर संगीत से डिप्लोमा किया फिर श्री 1008 महंत श्री रूप दास जी ठाकुरद्वारा भादरडा से दीक्षा ग्रहण की गुरुदेव भिष्म योगी थे गुरुदेव ने एक सत्संग में करीब साहेब एक दोहे ने लिंक काटने को मजबूर कर दिया वो दुहा था
करीब करीब क्या कहें सै जो आप शरीर पंच इन्दरी वस करो तो बन जाओ दास कबीर ऐसा महान योगी पर गांव वालों ने लाघछन लगाया अपशब्द भी बोले मेरे दीक्षां में भी गुरुजी ने अमर मंत्र दीया गुरुजी गांजा भांग पीते थे मैं भी भांग पीता था एक बार द्वारका जाने का मैंने मानस बना बनाया तो गुरु जी ने कहा वहां जाकर भूल जा पर चाप लगावाएगा तो मेरे हाथ से ही राम तिलक दे दू गुरु जी की असीम कृपा से राम तिलक से राज तिलक की प्राप्ति हुई अगर मैं राम तिलक के खिलाफ होता तो मेरे पास हजार डॉक्टर थे मैं सर्जरी करवा कर राम तिलक को आठवां सकता था लेकिन नहीं गुरुदेव ने लिंक कांटा अपनी पिक्चर से मैंने बी लिंग कांटा व राम तिलक लिया अपनी इच्छा से भविष्य को ध्यान से रखते हुए हमारे राव राजा श्री गीगा राम जी के पिताजी भगवान दास जी के आदर सहित बुलवाया गया वही वासन करवायी गया समस्त ग्राम वासियों के सामने कार्यक्रम संपन्न हुआ जैसे-जैसे समय बदलता गया गुरुदेव साकेत घाम पधार गये गुरुदेव ने किसी भगत के सवप्न मैं आकर कहा कि मेरे शिष्य विवेक दास को लाकर गाड़ी पर बैठा देना हमारे दादा गुरु श्री 1008 धूड दास जी साकेत धाम पधारे तब मेरे गुरुदेव तीर्थ यात्रा पर थे मेरे गुरुदेव के महाप्रयाण के समय विवेक दास जी भी तीर्थ यात्रा पर बंगाल में थे वहां से तंत्र मंत्र यंत्र की शक्तियां हासिल की जो आज भी काम कर रही हैं
हर सीज के दो पहलू होते हैं हिरण वन में घास खाकर उदर पुर्ती करता है शेर बिना कारण पीछा करता है सुबह चूहे का बिल्ली बिना कारण पिसा करता है इस प्रकार भगवान भी राम का विरोध मां केकैय ने किया सती माता का विरोध एक धोबी ने किया सूरज चांद का विरोध राहु केतु करते हैं इस तरह उल्लू के ना देखने से सूर्य का प्रकाश रोक नहीं सकता सियार यदि शेर की खाल ओढ तो शेर नहीं हो सकता किसी कवि ने कहा है
सोने में वही दाग सौगंध ना गाली जामो कस्तूरी में वही दाग काले रंग पाया है रामजी में वही दाग हिरण की शिकार केनी रावण में वही दाग सीता हर लायो है इंदर में वही दाग गौतम घर गगन कीयो अहिल्या में वही दाग इंद्र को अपनाया है कहे कवि देवीदास बिना दाग कोई नहीं जरा ऊपर तो देखो दाग चांद में लगाई हो हैं गुलाब के तने में कांटे होते हैं फूल कितना महक देता है ऐसे महान गुरुदेव की भी कई लोग आलोचना करते थे आती कभी कुत्तों की परवाह नहीं करता साधु लोगों की संसार बुरी बुरी बातों का ध्यान नहीं लाते वह अने आत्मा कल्याण मैं मस्त रहते हैं
मेरे जीवन में परम आदरणीय आध्यातमिक व राजनीतिक गुरु श्री श्री हरि शंकर जी राजपुरोहित जालौर साधु व सरी सरी वन सूर्या श्री मरारदान जी साहब नांदिया बागोड़ा सारण भूषण इंन्होने मुझे प्यार दिया सरवन नगरी भादरडा के प्रियजनों ने जो प्यार उसको मैं नहीं बुला सकता हूं अंतिम मेरे प्रेम दिया दीया ढढारपटटी हवेली पट्टी को मैं साधुवाद देता हूं दिन दुआ प्रेम की बरसात कर रहे हैं इनमें जसवंत पूरा गांव के अमरदीप मार्बल ग्रुप हमारा खूब ध्यान रखा पूरी नाव को चलाने वाली मां माहामाया आशापुरा मोदरा व श्री कृष्णा व श्री रामसीन आप नाथ महादेव को श्रेय जाता है इनकी कृपा से जहां हूं सुखी हूं भादरा नगरी की पार्टी बाजी से तंग आकर गांव सोडा दीया पाली में ठाकुर जी की आज्ञा से तप्त स्थल बना दिया
नैतिक कर्म इस प्रकार के हैं
रात का 1:00 बजे जगना
1:30 बजे स्नान
2:00 बजे गाय कुत्तों की रोटी
2:30 पर दैनिक कार्यक्रम
5:00 बजे आरती
8:00 बजे पुराण
फिर 2:00 बजे से 5:00 बजे तक रात 9:00 बजे से 10:00 बजे तक सब गुप्त भजन प्रक्रिया है जो कहने की नहीं है गुरुदेव ने मना किया तो भी मे लिखता हूं रात दिन परोपकार चलता रहता है गुरुदेव विवेक दास जी भादरडा मैं किसी के घर नहीं पाली में भी किसी के घर नहीं गए गए पाली में भी गुरुदेव के बड़े बड़े भक्त हैं रात दिन सेवा देते हैं जय श्री कृष्णा जय श्री कृष्णा जय श्री कृष्णा

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